फर्जी BAMS डिग्री मामले में महिला सहित दो फर्जी डॉक्टर और गिरफ्तार ..जाली डिग्री के ज़रिए सरकारी नौकरी की थी तलाश.. 

फर्जी BAMS डिग्री मामले में एक के बाद एक जालसाज डॉक्टरों की गिरफ्तारीयों का सिलसिला जारी है. अब इस फर्जीवाड़े में एक महिला सहित दो और फर्जी डॉक्टर को दून पुलिस ने गिरफ्तार किया. ऐसे में अब तक इस मामले में मास्टरमाइंड इमरान एवं इम्लाख सहित14 गिरफ्तारियां हो चुकी है.

पुलिस खुलासे के मुताबिक देशभर में फर्जी डॉक्टरों की डिग्री मामले में मुजफ्फरनगर निवासी मास्टरमाइंड इम्लाख को 7 लाख रुपये देकर फर्जी BAMS डिग्री प्राप्त करने वाला गिरफ्तार अशफाक पुत्र अखलाक अहमद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर, थाना फतेहपुर ग्राम बेसरो रहने वाला है. जबकि 7 लाख रुपये में ही बीएमएस की जाली डिग्री लेने वाली ज्योति पत्नी अशोक कुमार जनपद हरिद्वार के थाना भगवानपुर, ग्राम दादापट्टी की रहने वाली है.. पुलिस खुलासे के मुताबिक गिरफ्तार किए गए दोनों अभियुक्त फिलहाल फ़र्जी बीएमएस डिग्री का इस्तेमाल कर कोई प्रैक्टिस नहीं कर रहे थे.

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मास्टरमाइंड इम्लाख ने पहले 12वीं पास का प्रमाण पत्र बनाया फिर BAMS की फर्जी डिग्री दिलवाई..

दून पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किये गए महिला और पुरुष फर्जी डॉक्टर से पूछताछ में अलग-अलग तरह जानकारी सामने आई हैं.अभियुक्त ज्योति छुटमलपुर (यूपी) स्थित कृष्णा कॉलेज में रिसेप्शनिस्ट का कार्य करती थी. जहां उसकी मुलाकात फर्जी डिग्री बनाने वाले मास्टरमाइंड इम्लाख से हुई. इम्लाख ने ज्योति से 50 हजार रुपये लेकर पहले उसकी 12वीं बायोलॉजी की फर्जी मार्कशीट और प्रमाण पत्र बनाया.और फिर उसके बाद उससे 7 लाख रुपए वसूल कर उसे BAMS की जाली डिग्री उपलब्ध कराई.वहीं दूसरी तरफ गिरफ्तार अभियुक्त अशफाक ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने पूर्व में DUMS का कोर्स किया था. इसके पश्चात उसकी मुलाकात अपने एक दोस्त के माध्यम से रुड़की में इम्लाख से हुई. यहाँ भी इम्लाख ने 7 लाख रुपये लेकर अशफाक को बीएएमएस की फर्जी डिग्री उपलब्ध कराई. इतना ही नहीं इस गोरखधंधे के मास्टरमाइंड  इम्लाख ने इस डिग्री का पंजीकरण भी भारतीय चिकित्सा परिषद में कराया.

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फर्जी डिग्री के ज़रिये सरकारी नौकरी की थी तलाश: पुलिस

देहरादून डीआईजी दलीप सिंह कुँवर के मुताबिक जांच पड़ताल में पता चला कि फर्जी बीएमएस डिग्री लेने वाले ज्योति और अशफाक फिलहाल कोई डॉक्टरी की प्रैक्टिस नहीं कर रहे थे.बल्कि दोनों इस मौके की तलाश में थे कि कोई सरकारी नौकरी रिक्त पद निकले,ताकी वह लोग अपनी जाली डिग्री के माध्यम से नौकरी पा सके.

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बाईट:दलीप सिंह कुँवर, DIG, देहरादून

खबर सनसनी डेस्क

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