
गिरफ्तार अपराधियों द्वारा संगठित साईबर अपराध को अंजाम देने हेतु आम जनमानस के खाते खुलवाये जाते थे, जिनका साईबर अपराधियों के साथ मिलकर साईबर धोखाधड़ी में प्रयोग किया जाता था..
भोली भाली जनता को लालच एंव गुमराह कर उनके खाते खुलवाये जाते थे,जिन्हे साईबर क्राईम जैसे संगठित अपराधियों के साथ साझा कर,धोखाधड़ी के लिये प्रयुक्त किया जाता था..
देहरादून : साइबर ठगी करने के लिए भोली भाली जनता को गुमराह कर उनके म्यूल खाता खुलवाने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर उत्तराखंड एसटीएफ साइबर पुलिस ने तीन शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है पकड़े गए अभियुक्त के कब्जे से अलग-अलग बैंकों की पासबुक चेक बुक डेबिट कार्ड पैन कार्ड आधार कार्ड और अलग-अलग बैंकों के मोहरें बरामद की गई है. STF,एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में एसटीएफ की साईबर पुलिस टीम के द्वारा साईबर अपराधियों को म्यूल एकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह/ पैनल का भाडांफोड किया है. पकड़े गये इन अपराधियों के द्वारा भोली भाली जनता को लालच एंव गुमराह कर उनके खाते खुलवाये जाते थे,जिन्हे साईबर क्राईम जैसे संगठित अपराधियों के साथ साझा कर, धोखाधड़ी के लिये प्रयुक्त किया जाता था.इनके द्वारा खुलवाये गये खातों में विभिन्न राज्यों के पीड़ितों की लाखों रुपये की धनराशी का लेन देन हुआ है.जिनसे इनके द्वारा अच्छा खासा मुनाफा कमाया गया. इस सम्बन्ध में गोपनीय सूचना एंव तकनीकी विश्लेषण करने के उपरान्त एसटीएफ की साईबर पुलिस टीम को आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये.मामलें की गंम्भीरता के दृष्टिगत एसएसपी एस0टी0एफ0 उत्तराखण्ड अजय सिंह के दिशा निर्देशन और सहायक पुलिस अधीक्षक कुश मिश्रा आई0पी0एस0 के निकट पर्यवेक्षण में उपरोक्त सूचना के आधार पर एसटीएफ की साईबर पुलिस टीम के द्वारा हरिद्वार से अभियुक्तगणों की गिरफ्तारी की गयी. और फिर साईबर थाना देहरादून पर धारा 111,318(4),61(2) बीएनएस एंव 66 डी आई टी पंजीकृत की गयी. एसटीएफ एसएससी अजय सिंह के अनुसार इस प्रकरण में अन्य अभियुक्तों की तलाश जारी ह, और बैंक खातों एवं डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है.


साइबर अपराधियों को खाता उपलब्ध कराकर मोटा कमीशन वसूलते थे गिरफ्तार अभियुक्त.
एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में विधिक कार्यवाही करते हुए पाये गया कि गिरफ्तार अभियुक्तों द्वारा भोले भाले व्यक्तियों को झांसे में लेकर उनके नाम से फेक फर्म तैयार कर, उसके समस्त दस्तावेज तैयार किये जाते थे, जिसके आधार पर बैक में फर्म के नाम पर काँर्पोरेट/करंट एकाउंट खोला जाता था.जिसे रोड़वेज या अन्य माध्यमों से दिल्ली में बेचा जाता था. इसके बाद इन खातों में साईबर अपराधियों के द्वारा साईबर अपराध से प्राप्त धोखाधड़ी के पैसो का लेन देन किया जाता था. इसके लिए अभियुक्तों के द्वारा अच्छा खासा कमीशन लिया जाता था. गिरफ्तार किए गए तीनों अभियुक्तों से प्राप्त पासबुक/खातों के विरुद्ध एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत भी दर्ज होना पाया गया.पकड़े गये अभियुक्तों के क़ब्जे से विभिन्न पासबुक, चैकबुक, डेबिट कार्ड आदि बरामद किया गया. वही 29 मार्च 2026 को हरिद्वार से देहरादून लाकर गहन पूछताछ की गयी एंव अभियुक्तगणों के साथियों के बारे में गहन पूछताछ जारी है एंव अभियुक्त के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है।
गिरफ्तार अभियुक्त :-
- रवि पुत्र अशोक कुमार उम्र 31 हाल नि0 नवोदय नगर कालोनी रोशनाबाद थाना सिडकुल हरिद्वार प्लोट न0 100 नवल सुरजपुर थाना किठोड मेरठ उ0प्र0।
- राजन चौधरी पुत्र ओम प्रकाश चौधरी उम्र 35 वर्ष नि0 हाल प्रेमपुरी मोटामहादेव नजीबाबाद रोड़ थाना नजीबादबाद, कृपाल आश्रम शिवालिक नगर थाना सिडकुल जनपद हरिद्वार।
- विनित राणा पुत्र धीर सिह उम्र 25 वर्ष नि0 ग्राम मथाना पोओ0 दाबकी कला थाना खानपुर जनपद हरिद्वार।
बरामदा माल का विवरण:
- एक वाहन UK17Y 3762 SWIFT CAR ।
- तीन पासबुक विभिन्न बैको की ।
3.तीन चैक बुक विभिन्न बैको की ।
4.पाँच मोबाईल फोन अलग-अलग कम्पनी के।
5.एक बैक बुक आईडीबीआई बैक की।
6.एक चैक जना स्माल बैक का।
7.दस डेबिट कार्ड विभिन्न बैको के।
8.पाँच पेन कार्ड ।
9.तीन आधार कार्ड ।
10.पाँच मुहर अलग-अलग फर्म की।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ उत्तराखण्ड की जनता से अपील
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ अजय सिंह ने जनता से अपील की है कि—
• अन्जान नम्बरों से आने वाली वीडियो कॉल से बात न करें तथा कोई भी व्यक्तिगत सूचना/दस्तावेज साझा न करें।
• कोई भी एजेंसी ऑनलाइन “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती है।
• फर्जी निवेश ऑफर, धनराशि दोगुना करने के प्रलोभन, YouTube/Telegram आधारित स्कीमों में निवेश न करें।
• गूगल से कस्टमर केयर नंबर सर्च कर सीधे कॉल करने से बचें।
वित्तीय साइबर अपराध होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।








