
84 Cheque Withdrawal Locations का Verification—37 FIR | 22 Suspect SIM-POS का Verification—10 FIR…..644 Suspect SIM एवं 630 IMEI Block | 442 संदिग्ध मामलों का Verification | 10 साइबर अपराधी गिरफ्तार..
240 पूर्व से गिरफ्तार साइबर अपराधियों की समन्वय पोर्टल के माध्यम से की गई Mapping से 100 से अधिक अन्य साइबर अपराधों में शामिल होना प्रकाश में आया…ठगी करने वालों से लेकर ठगी की रकम निकालने वालों और साइबर अपराध में इस्तेमाल संसाधन उपलब्ध कराने वालों तक—पूरी Cyber Crime Chain पर कार्रवाई
Police Headquarters के निर्देश पर साइबर अपराधियों एवं उनके नेटवर्क के विरुद्ध प्रदेशव्यापी “ऑपरेशन हॉटस्पॉट” संचालित करते हुए STF, Cyber Crime Units, District Cyber Cells एवं समस्त जनपद पुलिस द्वारा साइबर अपराध से जुड़े Money Mules, Suspect Bank Accounts, SIM, IMEI, ATM/Cheque Withdrawal Locations, SIM-POS एवं अन्य Cyber Crime Hotspots को चिन्हित कर प्रभावी कार्रवाई की गई।
इस अभियान में Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), Department of Telecommunications (DoT), Reserve Bank of India (RBI) एवं अन्य संबंधित संस्थाओं से प्राप्त Technical एवं Financial Information का विश्लेषण कर उसे Ground Action में परिवर्तित किया गया।
पहले Intelligence तैयार हुई, फिर Hotspots पर हुआ Ground Action
देहरादून: 01 जुलाई से 31 जुलाई, 2026 तक “साइबर सुरक्षा अभियान” संचालित कर साइबर अपराध से जुड़े Digital, Telecom एवं Financial Indicators का विस्तृत तकनीकी विश्लेषण किया गया। इस दौरान साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे Mobile Numbers, SIM/IMEI, Mule Bank Accounts, ATM/Cheque Withdrawal Locations, Suspect Bank Accounts, SIM-POS एवं अन्य संदिग्ध Digital/Financial Indicators की जानकारी एकत्र कर उनका विश्लेषण किया गया तथा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं को आपस में Correlate कर Actionable Intelligence विकसित की गई।
वही I4C के विभिन्न Platforms/Portals और DoT, RBI एवं अन्य संबंधित संस्थाओं से उपलब्ध डेटा का STF की Central Technical Team एवं District Cyber Cells द्वारा विश्लेषण किया गया। इसके आधार पर जनपद स्तर पर संबंधित संदिग्ध व्यक्तियों, खातों, मोबाइल नंबरों, स्थानों एवं अन्य Cyber Crime Indicators का Ground Verification कराया गया तथा प्राथमिकता वाले Hotspots चिन्हित किए गए….विशेष रूप से Mule Bank Accounts, ATM Withdrawal Locations, Cheque Withdrawal Locations, Suspect SIM-POS, Suspect Locations, SIM एवं IMEI पर फोकस किया गया। इनमें SIM, IMEI एवं अन्य Digital/Telecom Resources का उपयोग साइबर अपराध को अंजाम देने में किया जाता है, जबकि Mule Accounts एवं ATM/Cheque Withdrawal Points का उपयोग अपराध से प्राप्त धनराशि को Receive, Transfer, Layer एवं Withdraw करने में किया जाता है।






इस प्रकार एक माह के Data Analysis एवं Intelligence Generation के बाद चिन्हित Hotspots पर 24 अगस्त से 01 सितम्बर, 2026 तक 7 दिवसीय “ऑपरेशन हॉटस्पॉट” के माध्यम से व्यापक Ground Action की गई।
PRATIBIMB Map से Cyber Crime Hotspots की पहचान
I4C द्वारा विकसित PRATIBIMB Map एक Real-Time, GIS-Based Criminal Mapping Feature है, जिसके माध्यम से Cyber Crime से जुड़े Digital, Telecom, Financial एवं Geographical Indicators को Map एवं Analyse किया जाता है।
सरल शब्दों में, PRATIBIMB Map के माध्यम से साइबर अपराध से जुड़े अलग-अलग Digital, Telecom और Financial संकेतकों को Map पर देखकर उनके बीच संबंधों एवं संदिग्ध कड़ियों की पहचान करने में सहायता मिलती है।
PRATIBIMB आधारित Analysis के माध्यम से Suspect Locations, SIM/IMEI, SIM-POS, Mule Bank Accounts, Suspect Bank Accounts, ATM Withdrawal Locations एवं Cheque Withdrawal Locations जैसी कड़ियों को चिन्हित कर उनका Field Verification कराया गया।
इसका उद्देश्य केवल संदिग्ध Locations की पहचान करना नहीं, बल्कि Cyber Crime में प्रयुक्त Digital/Telecom Infrastructure तथा अपराध से प्राप्त धनराशि के Movement एवं Withdrawal Network दोनों तक पहुंचना रहा।
“ऑपरेशन हॉटस्पॉट” : 7 दिवसीय सघन Ground Action
24 अगस्त से 01 सितम्बर, 2026 तक संचालित विशेष “ऑपरेशन हॉटस्पॉट” में चिन्हित Financial, Telecom एवं Geographical Cyber Hotspots पर प्रदेशभर में Ground Verification, दबिश, पूछताछ, Digital Evidence Collection, FIR, गिरफ्तारी एवं अन्य वैधानिक कार्रवाई की गई।
820 Suspect Bank Accounts का Verification—159 FIR
अभियान में साइबर अपराध से जुड़े 820 Suspect Bank Accounts का Verification किया गया। Banking Records, Account Transactions एवं स्थानीय जांच के आधार पर 159 FIR पंजीकृत की गईं।
Mule Accounts साइबर अपराध की Financial Chain का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की धनराशि को Receive करने, Transfer/Layer करने तथा ATM/Cheque के माध्यम से Withdraw करने में किया जाता है।
इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल Mule Account Holder की पहचान तक सीमित न रहकर Account Operators, Facilitators एवं उनके पीछे सक्रिय Cyber Criminal Network तक पहुंचना रहा।
1. ATM Withdrawal Locations—ठगी की रकम को Cash में बदलने वाले Points पर कार्रवाई
साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि Mule Accounts में पहुंचने के बाद अपराधियों द्वारा अक्सर ATM के माध्यम से Cash Withdrawal कर Digital Money Trail को तोड़ने का प्रयास किया जाता है।
अभियान में 1,236 ATM Withdrawal मामलों/Locations का Verification किया गया तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 32 FIR पंजीकृत की गईं। इससे Cash निकालने वाले व्यक्तियों, इस्तेमाल ATM Cards, संबंधित Mule Accounts एवं स्थानीय Facilitators की पहचान में सहायता मिली।
2. Cheque Withdrawal Locations—Fraud Money की निकासी करने वालों की पहचान
साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि को Mule Accounts से Cheque के माध्यम से Cash के रूप में निकालने अथवा अन्य खातों में Transfer करने वाले Points पर भी विशेष कार्रवाई की गई।
अभियान में 84 Cheque Withdrawal मामलों/Locations का Verification कर 37 FIR पंजीकृत की गईं। इससे संबंधित Account Holders, Beneficiaries एवं Facilitators की पहचान कर Financial Money Trail को आगे विकसित किया गया।
3. Suspect SIM एवं IMEI—Cyber Criminals के Digital Footprints पर प्रहार
साइबर अपराध में प्रयुक्त पाए गए 644 संदिग्ध SIM तथा 630 IMEI को Block कराया गया तथा 442 संदिग्ध शिकायतों/मामलों का सत्यापन किया गया।
SIM/IMEI एवं Suspect Locations के विश्लेषण से अपराध में इस्तेमाल Mobile Devices, Telecom Resources, संदिग्ध व्यक्तियों एवं उनकी सक्रिय Locations की पहचान में सहायता मिली। इनके Blocking एवं Verification के माध्यम से अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे Digital/Telecom Infrastructure को निष्क्रिय कर संबंधित नेटवर्क तक पहुंचने की कार्रवाई की गई।
4. Suspect SIM-POS—Cyber Crime की Telecom Supply Chain पर कार्रवाई
Cyber Criminals द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले SIM कई मामलों में संदिग्ध/अनियमित KYC अथवा अन्य व्यक्तियों की पहचान के दुरुपयोग से प्राप्त किए जाते हैं। ऐसे SIM का उपयोग Victims से सम्पर्क, Fraud Calls, OTP/Banking Services तथा Mule Accounts से जुड़े Mobile Numbers के रूप में किया जा सकता है।
इस Supply Chain पर कार्रवाई करते हुए 22 Suspect SIM-POS का Verification कर 10 FIR पंजीकृत की गईं।
इसका उद्देश्य केवल अपराध में इस्तेमाल SIM को Block करना नहीं, बल्कि ऐसे SIM उपलब्ध कराने वाले POS/Facilitators तक पहुंचकर Telecom Supply Chain पर कार्रवाई करना रहा।
हरिद्वार में “नवादा ग्रुप” का पर्दाफाश—05 गिरफ्तार, 200 से अधिक Mule Accounts की कड़ियां
“ऑपरेशन हॉटस्पॉट” के दौरान हरिद्वार में थाना श्यामपुर पुलिस द्वारा Mule Accounts, ATM Withdrawal, Suspect SIM एवं Cheque Withdrawal Data के विश्लेषण के आधार पर संगठित Cyber Fraud Network “नवादा ग्रुप” का खुलासा करते हुए 05 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।
तकनीकी जांच में इस नेटवर्क से जुड़े 200 से अधिक Bank Accounts सामने आए, जिनमें साइबर ठगी की धनराशि का सीधे Layer-01 में Transaction पाया गया।
अभियुक्तों के कब्जे से 45 से अधिक ATM Cards, 20 Bank Passbooks, 02 Laptops तथा 17 Mobile Phones बरामद किए गए।
प्रारम्भिक जांच में सामने आया कि Loan, Online Trading एवं पैसा दोगुना करने जैसे प्रलोभनों से प्राप्त ठगी की धनराशि को Mule Accounts में Transfer कराया जाता था। इसके बाद ATM से Cash Withdrawal तथा CDM के माध्यम से अन्य Bank Accounts में Deposit/Transfer कर Money Trail को तोड़ने का प्रयास किया जाता था।
इस नेटवर्क से संबंधित कार्रवाई में मथुरा में भी गिरफ्तारी की गई तथा नेटवर्क से जुड़े अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध नवादा, बिहार में भी तलाश/वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
STF की पूर्व कार्रवाई में भी सामने आया संगठित Mule Account Network
इसी Data-Based Investigation Strategy के क्रम में 24 जुलाई, 2026 को STF की Financial Fraud Unit द्वारा अन्तर्राज्यीय साइबर गिरोह के 02 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।
I4C/NCRP पर प्राप्त शिकायतों एवं संदिग्ध Bank Accounts के विश्लेषण से सामने आया कि आरोपी नौकरी एवं आसान Loan दिलाने के नाम पर लोगों के Bank Accounts खुलवाकर उनका नियंत्रण स्वयं रखते थे तथा इन खातों का उपयोग OLX Fraud सहित विभिन्न Cyber Crimes से प्राप्त धनराशि को Receive एवं Withdraw करने में करते थे।
कार्रवाई में 04 Mobile Phones, 05 IndusInd Bank Kits, ₹15,000 नकद एवं अन्य Digital/Documentary Evidence बरामद किए गए।
हरिद्वार में ATM Withdrawal के माध्यम से Cyber Fraud की रकम निकालने वाले 02 अभियुक्त गिरफ्तार
जनपद हरिद्वार के थाना पथरी पुलिस द्वारा ATM Withdrawal Data के आधार पर 02 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि इनके Bank Accounts में Cyber Fraud की Layer-01 की धनराशि Credit होती थी, जिसे ये 05 प्रतिशत कमीशन लेकर ATM के माध्यम से निकालते थे। कार्रवाई से साइबर ठगी की रकम को आगे Transfer एवं Withdraw करने वाले व्यक्तियों की पहचान में महत्वपूर्ण सफलता मिली।
कोटद्वार में ₹3.86 लाख की Forex Trading साइबर ठगी का आरोपी गिरफ्तार
जनपद पौड़ी गढ़वाल के कोतवाली कोटद्वार में क्वाटम कैपिटल कम्पनी के माध्यम से Forex Trading के नाम पर ₹3.86 लाख की साइबर ठगी के संबंध में मुकदमा अपराध संख्या 123/2026, धारा 318(4) BNS पंजीकृत किया गया था। विवेचना में आशीष रिचर्ड पुत्र प्रकाश बैंजमिन, निवासी सिविल लाइन, रुड़की, हरिद्वार की संलिप्तता प्रकाश में आई। जांच में अभियुक्त के 08 बैंक खाते पाए गए, जिनमें साइबर ठगी की लगभग ₹1.50 करोड़ की धनराशि प्राप्त होना पाया गया। इनमें से लगभग ₹7 लाख की धनराशि वर्तमान में फ्रीज की गई है।
अभियुक्त लगातार फरार चल रहा था तथा मोबाइल फोन का प्रयोग नहीं कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी पर ₹1,500 का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस टीम द्वारा सूचना के आधार पर दिनांक 01 सितम्बर 2026 को पौड़ी से अभियुक्त को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। साइबर पोर्टल पर अभियुक्त के विरुद्ध कोलकाता, काशी, कर्नाटक, अमृतसर, तमिलनाडु सहित अन्य स्थानों से कुल 19 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें लगभग ₹32.18 लाख की धनराशि संबंधित है।
Samanvaya से Inter-State Cyber Criminal Network की Mapping
वर्ष 2026 में 240 साइबर अपराधियों/संदिग्धों का विवरण I4C के Samanvaya Portal पर Upload किया गया तथा उनकी अन्य राज्यों के Cyber Crime Cases से Mapping कर 100 से अधिक Inter-State Linkages स्थापित किए गए हैं।
Samanvaya Portal I4C का एक Inter-State Cyber Crime Coordination Platform है, जिसके माध्यम से अलग-अलग राज्यों में सामने आए Cyber Criminals, Suspects एवं Cyber Crime Cases की जानकारी को आपस में Match एवं Map करने में सहायता मिलती है।
इन Linkages के आधार पर संबंधित राज्यों से Coordination कर संदिग्धों का Verification, Criminal History Matching तथा गिरफ्तारी एवं अन्य आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
CIAR से Inter-State Cyber Investigation को गति
वर्ष 2026 में उत्तराखण्ड में पंजीकृत Cyber Crime Cases में अन्य राज्यों में चिन्हित आरोपियों/संदिग्धों के संबंध में CIAR (Cyber Investigation Assistance Request) के माध्यम से BNSS धारा 35(3) के 303 नोटिस अन्य राज्यों को तामीली हेतु भेजे गए।
CIAR (Cyber Investigation Assistance Request) एक डिजिटल माध्यम है, जिसके जरिए साइबर अपराध की जांच में दूसरे राज्य से संबंधित व्यक्ति, दस्तावेज, नोटिस अथवा अन्य Investigation Assistance के लिए संबंधित राज्य की पुलिस से समन्वय किया जाता है।
इसी प्रकार अन्य राज्यों के Cyber Crime Cases में उत्तराखण्ड में चिन्हित आरोपियों/संदिग्धों के संबंध में CIAR के माध्यम से प्राप्त 247 नोटिस उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा तामील कराए गए।
राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखण्ड की बेहतर होती Ranking
Cyber Crime से संबंधित प्रथम दो PRAGATI Reviews में उत्तराखण्ड ने क्रमशः 5वां एवं 4था स्थान प्राप्त किया। दूसरी PRAGATI Review में देश में 4th Position* प्राप्त हुई।
1930/NCRP—₹23.44 करोड़ की साइबर ठगी की धनराशि Hold/Save
“ऑपरेशन हॉटस्पॉट” के अतिरिक्त वर्ष 2026 में 1930/NCRP पर प्राप्त 18,749 Cyber Crime Complaints पर कार्रवाई करते हुए पुलिस, बैंकों एवं Financial Institutions के समन्वय से लगभग ₹23.44 करोड़ की धनराशि Hold/Save कराई गई।
NCRP (National Cyber Crime Reporting Portal) भारत सरकार का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जहां नागरिक Cyber Crime की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। विशेष रूप से Financial Cyber Fraud की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 National Cyber Crime Helpline के माध्यम से शिकायत दर्ज कर ठगी की रकम को समय रहते संबंधित Bank/Financial Institution के स्तर पर Hold कराने का प्रयास किया जाता है।
इसी अवधि में प्राप्त 683 E-Zero FIR में से 659 को नियमित FIR में Convert/Link किया गया।
Enforcement के साथ Awareness—Cyber Crime के विरुद्ध दोहरी रणनीति
उत्तराखंड पुलिस द्वारा Cyber Crime Enforcement के साथ व्यापक Cyber Awareness एवं Prevention पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। इसी क्रम में –
27 अगस्त, 2026 को आयोजित राज्यव्यापी Virtual Cyber Awareness Programme में प्रदेश के लगभग 1,100 से अधिक राजकीय विद्यालयों के कक्षा 6 से 12 तक के लगभग 1.75 लाख छात्र-छात्राओं ने वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों को AI/Deepfake, Cyber Bullying, Sextortion, Online Gaming, Digital Arrest, Investment Fraud, Social Media Safety एवं 1930/NCRP के संबंध में जागरूक किया गया। जिसमें *DGP उत्तराखण्ड श्री दीपम सेठ द्वारा विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर उन्हें *Technology एवं Artificial Intelligence का उपयोग शिक्षा, Skill Development एवं भविष्य निर्माण के लिए जिम्मेदारीपूर्वक करने तथा Cyber Smart Citizen बनने* के लिए प्रेरित किया गया।
2026 में लगातार Cyber Awareness—स्कूल से Social Media तक व्यापक पहुंच
01 जनवरी से 30 अगस्त, 2026 तक प्रदेशभर में 5,688 विद्यालयों/महाविद्यालयों एवं व्यावसायिक संस्थानों, 3,423 जागरूकता शिविरों, 4,810 सार्वजनिक स्थानों, 151 नुक्कड़ नाटकों, 2,782 Social Media Campaigns, 3,680 School/College Programmes, 18 FM Channel Programmes, 236 जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 29,935 Cyber Crime Helpline-1930 प्रचार गतिविधियों के माध्यम से Cyber Awareness का व्यापक प्रसार किया गया।
इसके अतिरिक्त 23,238 वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक किया गया तथा 5,509 Social Media Posts के माध्यम से Cyber Safety का संदेश प्रसारित किया गया।
02 सितम्बर, 2026 को अभियान के अंतिम चरण में सभी जनपदों में चिन्हित Money Mules को पुलिस लाइन/थानों पर बुलाकर काउंसलिंग एवं साइबर जागरूकता कराई गई। उन्हें बैंक खाते, UPI एवं मोबाइल नंबर के दुरुपयोग तथा अवैध लेन-देन से बचने के लिए जागरूक किया गया। आवश्यकतानुसार निवारक/कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें साइबर अपराध से दूर रहने की शपथ भी दिलाई गई।
साइबर हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष अभियान एवं Targeted Action
दिनांक 03-09-2026 को साइबर अपराध संबंधी डाटा के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर एवं नैनीताल जनपदों में चिन्हित Cyber Hotspot Zones पर विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के अंतर्गत Suspect Locations, Mule Account Holders, Cheque Withdrawal Locations एवं Suspect Bank Branches से संबंधित चिन्हित संदिग्धों के विरुद्ध STF (Cyber Crime) की Technical Team द्वारा संबंधित जनपद एवं थाना पुलिस के 04 Addl Sp, 10 Dysp, 20 SHO/SO, 132 SI/Addl SI, 240 HC, 1250 Cons व 08 कम्पनी PAC के लगभग 2000 पुलिस बल द्वारा Targeted Field Action किया जा रहा है। इस दौरान 300 से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों को निरुद्ध कर पूछताछ, संदिग्ध बैंक खातों एवं मोबाइल/SIM की जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नोटिस, अभियोग पंजीकरण एवं गिरफ्तारी की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
ऑपरेशन खत्म नहीं—Awareness भी रहेगी निरंतर, Cyber Criminals पर कार्रवाई भी रहेगी सख्त
पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड दीपम सेठ के निर्देशानुसार “ऑपरेशन हॉटस्पॉट” के बाद भी साइबर अपराध के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। प्रदेशभर में School/College, सार्वजनिक स्थानों एवं समाज के विभिन्न वर्गों के बीच Cyber Awareness Programmes को नियमित रूप से संचालित किया जाएगा। साथ ही PRATIBIMB, NCRP एवं अन्य तकनीकी माध्यमों से प्राप्त Intelligence का निरंतर विश्लेषण कर Cyber Crime Hotspots, Money Mules, Suspect Bank Accounts, SIM/POS तथा साइबर अपराध में प्रयुक्त अन्य Financial एवं Digital Infrastructure को चिन्हित किया जाएगा।प्राप्त Digital, Financial एवं Ground Intelligence के आधार पर साइबर अपराधियों, उनके सहयोगियों एवं Facilitators के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।









