क्यों बहुचर्चित हैं,हल्द्वानी-बनभूलपुरा का अतिक्रमण ?.सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पक्ष को माना!..

कोर्ट के निर्देश पर आगामी 19 मार्च से 31 मार्च तक जिला विधिक प्राधिकरण और जिला प्रशासन की देखरेख में बनभूलपूरा क्षेत्र में कैंप लगा कर आवास योजना के लाभार्थियों लिए आवेदन लिए जाने और उनका परीक्षण किया जायेगा है.. जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है.


देहरादून /हल्द्वानी :जब आप हल्द्वानी रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर उतरते हैं तो पास में विशेष समुदाय की भीड़ समेटे कथित अवैध बसावट वाला एक इलाका देखते होंगे यही है- बनभूलपुरा. बस्ती इसकी गफूर बस्ती जिसे ढोलक बस्ती भी कहते है, यहां की बदबू और गंदगी बिना एक पल गंवाए ये एहसास करा देती है कि ये जगह किसी नरक बस्ती से कम नहीं. जहां बाहरी राज्यों से आए हुए लोग सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण करते हुए बस्ते चले गए..बनभूलपुरा बस्ती हल्द्वानी के लिए आज ये सबसे बड़ी चिंता बनता जा रहा है,और इसके कई कारण हैं.यह सिर्फ एक थाना क्षेत्र की समस्या नहीं,बल्कि पूरे शहर के लिए एक सुरक्षा,प्रशासन और सामाजिक समेत जनसांख्यिकी संतुलन का सवाल बन चुका है.
सबसे पहले,बनभूलपुरा में अवैध और अनियंत्रित बसावट की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है. सरकारी जमीनों पर दशकों से बिना अनुमति घर और दुकानें बनती रही, गलियाँ सिकुड़ती गईं,और शहर के नक्शे में गड़बड़ी पैदा हुई.हालांकी प्रशासन कई बार कार्रवाई करने गया, लेकिन हमेशा विशेष समुदाय का “संवेदनशील इलाका” कहकर पीछे हटना पड़ा.इस वजह से ये इलाका धीरे-धीरे कानून के दायरे से बाहर लगता गया. वही जानकारों की माने तो ये पूरा इलाक़ा शुरू से कांग्रेस पार्टी का पुश्तैनी वोट बैंक है। जिसकी चर्चा सोशल मीडिया पर लगातार होती रहती है। कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी ने भी बनभूलपुरा आबादी को एक वोटबैंक की तरह हमेशा से इस्तेमाल किया..

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अपराधियों का गढ़ और पनाह क्षेत्र..
जानकार बताते हैं कि उत्तराखंड के सबसे ज्यादा अपराध और अपराधियों की पनाह लेने वाला क्षेत्र अगर कोई है, तो वह बनभूलपुरा थाना क्षेत्र माना जाता रहा है.अवैध खनन तस्करी,लकड़ी चोरी, सहित नशा ड्रग्स तस्करी से जुड़े अपराधों के अलावा यहां हर तरह के चोर,अपराधी पनाह लेते रहे है.और पुलिस प्रशासन के लिए हमेशा से सरदर्द बनते रहे है।

दूसरी बड़ी चिंता है डेमोग्राफिक असंतुलन..
हल्द्वानी का बनभूलपुरा अब शहर के बाकी हिस्सों से अलग पॉकेट जैसा बन गया है.यहाँ पुराने रहने वाले मुस्लिम खुद को वहां “अजनबी” महसूस करने लगे हैं.जब किसी इलाके में आबादी का संतुलन बिगड़ता है, तो संवाद कम और असुरक्षा की भावना ज्यादा बढ़ती है। बाहरी राज्यों से आए मुस्लिम लोगों ने यहां के पुराने वाशिंदों को भी असहज किया है.जब तक यहां की आबादी कुछ हजार थी, तो हल्द्वानी में अमन चैन का माहौल था. लेकिन जबसे बाहरी राज्यों के लोगों ने यहां आकर सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण किया, तब से यहां हालात बिगड़ते चले गए.

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तीसरी चिंता का विषय प्रशासनिक कमजोरी है.जब कोई भी कदम उठाने से पहले यह सोचना पड़े कि इससे विवाद या हिंसा बढ़ सकती है,तो इलाका धीरे-धीरे “No Go Zone” जैसा महसूस होने लगता है. वर्ष
2024 में अतिक्रमण हटाने की कोशिश के दौरान हुई हिंसा ने यह साफ कर दिया कि अब मामला सिर्फ जमीन का नहीं रहा, बल्कि कानून-व्यवस्था की चुनौती बन गया है. बनभूलपुरा की समस्या पूरे शहर पर मनोवैज्ञानिक असर डाल रही है.लोग डरने लगे हैं कि उनका इलाका सुरक्षित नहीं है,और भविष्य में इसी तरह अन्य हिस्सों में भी तनाव फैल सकता है.यह चिंता का विषय है कि अगर समय रहते धामी सरकार ने अवैध निर्माण, डेमोग्राफिक असंतुलन और प्रशासनिक ढील पर सख्त कदम नहीं उठाया गया,तो हल्द्वानी जैसे शहरों में स्थिति और गंभीर हो सकती!..

अतिक्रमण का मामला सुप्रीम कोर्ट में:..
बनभूलपुरा रेलवे जमीन पर अवैध बस्ती अतिक्रमण का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। पुराने रहने वाले मुस्लिम मानते है कि बाहरी क्षेत्रों से आए मुस्लिमों ने यहां अवैध कब्जे किए,जिसका खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ रहा है.
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 24 फरवरी 2026 को हुई,सुनवाई के दौरान जजों की खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया कि ये सरकारी भूमि पर अतिक्रमण है,और इसे हटाया जाएगा.
उत्तराखंड धामी सरकार,रेलवे मंत्रालय और भारत सरकार इस मामले में अपना पक्ष रख चुके है. अतिक्रमण करने वाले पक्ष से सलमान खुर्शीद और प्रशांत भूषण जैसे बड़े बड़े वकील भी अपना पक्ष कोर्ट में रख चुके है.
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस पक्ष को भी माना है कि वो अवैध रूप से कब्जेदार को पात्रता के आधार पर पीएम आवास जैसी योजनाओं का लाभ दे सकती है,और जो पात्र नहीं है,उन्हें 02 हजार रूपये महीना 06 माह तक दे सकती है. रेलवे और उत्तराखंड सरकार के वकीलों ने कोर्ट में कहा है कि जो बाहरी राज्यों से आए अतिक्रमण करने वाले लोग है,वो अपने राज्य में जाकर आवेदन करे.
अब कोर्ट ने आगामी 19 मार्च से 31 मार्च तक जिला विधिक प्राधिकरण और जिला प्रशासन की देखरेख में बनभूलपूरा क्षेत्र में कैंप लगा कर आवास योजना के लाभार्थियों लिए आवेदन लिए जाने और उनका परीक्षण किए जाने को निर्देशित किया है. जिसके लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है.
ऐसी जानकारी है कि सुप्रीम कोर्ट को 19 मार्च यानि ईद के बाद अपना फैसला सुना सकता है!.इसी का इंतजार सभी पक्ष को हैं..

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परमजीत सिंह लाम्बा

संपादक - ख़बर सनसनी PH-7454913200,7906640014

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