
सड़क पर स्कूल की पढ़ाई और उनकी फीस के संबंध में बातचीत को ही अख़बार रिपोर्टर ने अपहरण की घटना बना दी.
देहरादून :हमारे आसपास और देश/दुनियां में वास्तव में क्या घटित हो रहा है, इसको जानने का सबसे बड़ा माध्यम समाचार एजेंसी और खबरों से जुडा होता है,खबरें वो जिनका सरोकार सत्य और वास्तविकता से जुड़ा हो. लेकिन चिंता का विषय है कि,समाज को समाचार के जरिये आईना दिखाने वाले मिडिया हाउस के लोग अगर बिना तथ्यों के पुष्टि के भ्रामक और अफवाह भरी खबरें प्रसारित करें, तो इसका असर कितना गंभीर होगा.. जरा सोचिये…जिहाँ ऐसा इन दिनों उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ज्यादा देखने को मिल रहा है, यहाँ आये दिन सोशल मिडिया, अख़बार और चंद ख़बरनविजों द्वारा भ्रामक और बिना किसी तथ्यों की पुष्टि के झूठी खबरें देहरादून में प्रसारित कर रहे हैं.. ताजा मामला देहरादून के इसी रोड स्थित गांधी शताब्दी अस्पताल गेट के बाहर का है, जहाँ बीते 07फ़रवरी 2026 एक प्रतिष्ठित स्कूल की छात्रा के अपहरण (किडनेप )होने की भ्रामक खबर बिना पुष्टि किए एक राष्ट्रीय अखबार ने छाप दी. पुलिस ने आनंद-फानन में कार्रवाई शुरू की तो पता चला कि मामला तो कुछ और निकला. इस मामले में संबंधित छात्रा के स्कूल प्रबंधन ने भी अपहरण की उक्त खबर का पुरजोर खंडन किया.. उधर खबर लिखने वाले ने यह भी समाचार में लिखा कि घटनास्थल पर कोई सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं था जबकि पुलिस ने इस क्षेत्र में सीसीटीवी फुटेज का एक वीडियो निकला, जिससे पूरी सच्चाई सामने आयी.
CCTV फुटेज
सड़क पर स्कूल की पढ़ाई और उनकी फीस के संबंध में बातचीत को ही अख़बार रिपोर्टर ने अपहरण की घटना बना दी.
देहरादून पुलिस के अनुसार राष्ट्रीय समाचार पत्र में प्रकाशित एक खबर, जिसमें शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल के बाहर से छात्रा के अपहरण का प्रयास किए जाने के संबंध में समाचार प्रकाशित किया गया है, उक्त खबर का संज्ञान लेते हुए एसएसपी देहरादून के निर्देशों पर पुलिस द्वारा स्कूल प्रबंधन से संपर्क किया गया तो उनके द्वारा बताया गया कि दिनांक 07 फरवरी 2026 को गांधी शताब्दी अस्पताल के गेट के बाहर एक महिला पेशेंट, जिसके हाथ में पानी की बोतल थी, उसके द्वारा छुट्टी के बाद जा रही कुछ छात्राओं को रोक कर उनसे स्कूल की पढ़ाई तथा उनकी फीस के संबंध में जानकारी ली गई थी, परंतु समाचार पत्र द्वारा बिना किसी तथ्यों की पुष्टि के उक्त खबर को प्रकाशित किया गया है, जिसमें कोई सच्चाई नहीं है तथा स्कूल प्रबंधन द्वारा भी उक्त खबर का खंडन किया गया है।









