बीजेपी सूत्र बताते है कि वर्तमान में कांग्रेस के 06 विधायक उनके संपर्क में,ये उन विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते है,जो बीजेपी के पास नहीं आती है..
देहरादून /नैनीताल: क्या उत्तराखंड कांग्रेस में एक बार फिर से बगावत होने जा रही है ?..खबर है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी दौरे के बाद से कांग्रेस में कुछ ठीक ठाक नहीं है.चर्चाएं है कि हरीश रावत गुट के कई नेता इस समय बगावत के मूड में है.पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल के भतीजे दिनेश कुंजवाल ने कांग्रेस छोड़ कर उत्तराखंड क्रांति दल का दामन थाम लिया है…कुंजवाल परिवार का जागेश्वर विधान सभा सीट पर राजनीतिक दबदबा रहा है. सभी जानते है कि कुंजवाल परिवार और हरीश रावत में कितनी नजदीकियां है।
हरीश रावत स्वयं और उनके समर्थकों एवं पूर्व विधायक सहित अन्य नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हाशिए में डाला हुआ है..हरीश रावत के पुत्र आनंद रावत कभी प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष हुआ करते थे.लेकिन वह भी आज आज कांग्रेस में अपने पिता की तरह अलग थलग पड़ गए है।
पिथौरागढ़ विधायक मयूर महर भी हल्द्वानी की खड़गे की जनसभा से नदारद रहे. महर को भी हरीश रावत का करीबी माना जाता रहा है..कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने हरीश रावत और मयूर महर को अस्वस्थता के कारण ,हल्द्वानी जनसभा में न आना बताया है,जबकि जानकर मानते है कि हरीश रावत और उनके समर्थकों ने स्वयं ही खड़गे की जनसभा से दूरी बनाई हुई थी..
राजनीतिक गलियारों में एक और नाम की चर्चा है, वो नाम है प्रीतम सिंह. वे भी हल्द्वानी में राष्ट्रीय अध्यक्ष की जनसभा में न दिख कर देहरादून में नजर आए..बताया गया है कि हल्द्वानी में प्रीतम के पुत्र दिखाई दिए,राजनीतिक जानकार मानते है कि वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी की बगावत की ये भी एक अदा होती है.देहरादून- दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा इन दिनों खूब चल रही है कि कांग्रेस में एक टूट और होने जा रही है,इसमें कुछ विधायक और पूर्व विधायकगण भी बीजेपी का दामन थामेंगे तो कुछ उत्तराखंड क्रांति दल की तरफ जा सकते है!..
उल्लेखनीय है कि वामपंथी विचारधारा का एक खास युवा वर्ग इस समय उत्तराखंड क्रांति दल को उत्तराखंड की तीसरी शक्ति के रूप में उभार रहा है.हाल के कुछ राजनीतिक घटना क्रम में यूकेडी की भूमिका को राजनीतिक विशेषज्ञों ने बारीकी से देखा है,और ये स्वीकार किया है कि ये क्षेत्रीय दल पहले से ज्यादा प्रभावशाली हुआ है..
बीजेपी सूत्र बताते है कि कांग्रेस के वर्तमान में 06 विधायक उनके संपर्क में है,ये उन विधानसभा क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व करते है जो बीजेपी के पास नहीं आती है..
माना जा रहा है कि बीजेपी विधान सभा चुनाव आते ही इन्हें पाला बदलने को कह सकती है.ऐसा भी बताया जा रहा है कि इन विधायकों और कुछ पूर्व विधायकों की दिल्ली में शीर्ष बीजेपी नेताओं के साथ मुलाकाते भी हो चुकी है।
बीजेपी ने तीसरी बार लगातार उत्तराखंड में सरकार बनाने के लिए अपना ऑपरेशन शुरू कर दिया है,और इसकी भनक कांग्रेस के नेताओं को भी लग चुकी है,और वो बौखलाहट में सीएम पुष्कर सिंह धामी और अन्य नेताओं को घेरने के लिए सोशल मीडिया में युद्ध लड़ती नज़र आ रहीं है.इसकी बानगी हल्द्वानी कोतवाली की घटना हो या देहरादून में राहुल गांधी के दौरे के दौरान हुई अंदरूनी राजनीतिक उठा पटक,उसकी बेचैनी का ये सबूत है।
बरहाल राजनीतिक दृष्टि से उत्तराखंड में कांग्रेस में भीतरघात और अंदरूनी कलह की तस्वीर धीरे धीरे साफ हो रही है। माना जा रहा है कि अगले कुछ हफ्तों में ही कांग्रेस में बगावत का बिगुल बजता सुनाई दे सकता!..









