
सर्वे चौक–रायपुर से ISBT–प्रिंस चौक तक सड़कों पर अंधेरा, 13 अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी; DM के निर्देश पर मरम्मत अभियान तेज
देहरादून: चुनावी माहौल के बीच देहरादून की सड़कों पर पसरे अंधेरे को दूर करने के लिए जिला प्रशासन अब सक्रिय हो गया है। शहर के प्रमुख मार्गों पर खराब स्ट्रीट लाइटों की पड़ताल हुई तो एक-दो नहीं, बल्कि 806 स्ट्रीट लाइटें खराब मिलीं। यह आंकड़ा शहर की प्रकाश व्यवस्था और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब जिलाधिकारी के निर्देश पर मरम्मत अभियान तेज करने और अंधेरे वाले इलाकों को चिह्नित कर रोशनी की व्यवस्था दुरुस्त करने की कवायद शुरू की गई है।

13 अधिकारियों को जिम्मेदारी, विभागों को तत्काल मरम्मत के निर्देश
जन सुरक्षा, महिला सुरक्षा और रात में सुरक्षित आवागमन का हवाला देते हुए जिला प्रशासन ने शहर के प्रमुख मार्गों का स्थलीय निरीक्षण कराया। अभियान के तहत 13 अधिकारियों को अलग-अलग मार्गों की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्हें खराब स्ट्रीट लाइटों की पहचान करने के साथ उन स्थानों को भी चिह्नित करने के निर्देश दिए गए, जहां पर्याप्त रोशनी नहीं है।
निरीक्षण में प्रमुख सड़कें, चौराहे, बाजार, फ्लाईओवर, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास की प्रकाश व्यवस्था को जांच के दायरे में रखा गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद नगर निगम, एनएचएआई, एमडीडीए और स्मार्ट सिटी लिमिटेड को अपने-अपने क्षेत्र में खराब लाइटें तत्काल ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इन मार्गों पर सबसे ज्यादा अंधेरा, आंकड़े चौंकाने वाले
प्रशासन की निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रमुख मार्गों पर बड़ी संख्या में स्ट्रीट लाइटें खराब मिली हैं।
- ISBT शिमला बाईपास से प्रिंस चौक: 132 खराब लाइटें
- सर्वे चौक से रायपुर: 105 खराब लाइटें
- राजपुर रोड से मोहकमपुर: 94 खराब लाइटें
- सहस्रधारा क्रॉसिंग से पैसिफिक गोल्फ कोर्स: 83 खराब लाइटें और 2 हाईमास्ट लाइटें
- मसूरी डायवर्जन से सचिवालय: 81 खराब लाइटें
- घंटाघर से बुद्धा चौक होते हुए रिस्पना पुल: 65 खराब लाइटें
- घंटाघर से प्रेमनगर: 50 खराब लाइटें
- क्रॉस रोड मॉल से पवारा चौक: 49 खराब लाइटें
- घंटाघर से मसूरी डायवर्जन: 45 खराब लाइटें
- घंटाघर से निरंजनपुर मंडी: 31 खराब लाइटें
- रिस्पना पुल से ISBT: 28 खराब लाइटें
- बल्लूपुर चौक से ISBT: 26 खराब लाइटें
- शिमला बाईपास से गोरखपुर चौक: 15 खराब लाइटें
ये आंकड़े बताते हैं कि शहर के कई व्यस्त मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। खासकर रात में आवाजाही करने वाले लोगों और महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से यह स्थिति गंभीर है।
अब सवाल—मरम्मत कब तक पूरी होगी?
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मरम्मत में किसी भी तरह की लापरवाही या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को नियमित निगरानी कर निर्धारित समयसीमा में काम पूरा कराने को कहा गया है। लापरवाही मिलने पर संबंधित विभागों और एजेंसियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि केवल खराब लाइटें बदलना ही नहीं, बल्कि उन डार्क एरिया में भी पर्याप्त रोशनी उपलब्ध कराना अभियान का हिस्सा है, जहां अंधेरे के कारण दुर्घटनाओं और अप्रिय घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
चुनाव से पहले सक्रियता, जनता को अब नतीजों का इंतजार
देहरादून में 806 खराब स्ट्रीट लाइटों का सामने आना प्रशासनिक निगरानी और नियमित रखरखाव पर भी सवाल उठाता है। यदि प्रमुख मार्गों पर लंबे समय से रोशनी की समस्या थी, तो समय रहते इनकी मरम्मत क्यों नहीं हुई? क्या नियमित निरीक्षण में यह खामियां पहले सामने नहीं आईं?
अब प्रशासन ने अभियान तेज करने के निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब ये लाइटें वास्तव में ठीक होंगी और अंधेरे वाले स्थानों पर रोशनी पहुंचेगी। जनता को आदेशों और निरीक्षणों से ज्यादा सड़कों पर जलती हुई स्ट्रीट लाइटों का इंतजार है।











