
देहरादून में फिर खूनी सड़क हादसा, दो महिलाओं समेत चार की गई जान; आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार विभाग?
देहरादून, 4 नवंबर 2026..
देहरादून के मोहब्बेवाला चौक पर बुधवार दोपहर एक बार फिर रफ्तार और सड़क सुरक्षा की गंभीर चुनौती सामने आई। करीब 3:30 बजे एक बेकाबू कंटेनर ट्रक ने कार को ऐसी भीषण टक्कर मारी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर कबाड़ में तब्दील हो गई। हादसे में कार सवार दो महिलाओं समेत चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि छह वर्षीय मासूम बच्चे को पुलिस और फायर रेस्क्यू टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
हादसे का मंजर इतना भयावह था कि कार के भीतर फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू टीम को कटर की मदद से कार का हिस्सा काटना पड़ा। घटनास्थल पर पुलिस, फायर सर्विस और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुट गई। क्षतिग्रस्त कार को देखकर हर कोई हादसे की भयावहता का अंदाजा लगा सकता था।
एक ही परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
पुलिस के अनुसार, कार में सवार सभी लोग सहारनपुर से देहरादून आ रहे थे। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान इस प्रकार हुई है—
- मिश्रेष कपूर (38 वर्ष)
- निशा आनंद कपूर (38 वर्ष)
- किरण कपूर (63 वर्ष)
- नीरज (कार चालक)
वहीं छह वर्षीय माहेर कपूर को पुलिस और फायर सर्विस की संयुक्त रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। चारों गंभीर घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में चारों की मौत हो गई।
हादसों के बाद भी क्यों नहीं बदल रही सड़क की तस्वीर?
मोहब्बेवाला चौक और आसपास का हाईवे क्षेत्र लगातार सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सवालों के घेरे में है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में गंभीर हादसे हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार दुर्घटनाओं के बावजूद सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं।
सड़क की बनावट, यातायात प्रबंधन, भारी वाहनों की आवाजाही, संकेतक, स्पीड कंट्रोल और दुर्घटना संभावित स्थानों पर सुरक्षा उपायों को लेकर संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से निरीक्षण और सुधार के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है कि इन दावों का असर आखिर सड़क पर कब दिखाई देगा?
अब जवाबदेही तय करने का वक्त
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
- मोहब्बेवाला चौक पर दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए स्थायी सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं हो पाए?
- क्या एनएच और संबंधित विभागों ने इस दुर्घटना संभावित क्षेत्र का तकनीकी सुरक्षा ऑडिट कराया है?
- भारी वाहनों की रफ्तार और आवाजाही नियंत्रित करने के लिए क्या प्रभावी व्यवस्था है?
- दुर्घटनाओं के बाद निरीक्षण और निर्देशों के बावजूद धरातल पर सुधार क्यों नजर नहीं आता?
जनहित का सवाल: आखिर कितनी और जिंदगियां खत्म होने के बाद इस सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे? अब केवल निरीक्षण, बैठकों और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। मोहब्बेवाला चौक पर दुर्घटनाओं के कारणों की निष्पक्ष तकनीकी जांच, जिम्मेदारियों का निर्धारण और तत्काल प्रभावी सड़क सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
चार जिंदगियों का यूं चले जाना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी है।
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