
पांच साल के आंकड़ों से चिन्हित होंगे जोखिम वाले क्षेत्र, टास्क फोर्स को कड़े निर्देश… लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई..
देहरादून: मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को लेकर देहरादून जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु और राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।जिलाधिकारी ने मातृ एवं शिशु मृत्यु के मामलों की रोकथाम के लिए टास्क फोर्स गठित करने, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की गहन निगरानी के निर्देश दिए। साथ ही पिछले पांच वर्षों के मातृ एवं शिशु मृत्यु के आंकड़ों का विश्लेषण कर GIS मैपिंग के जरिए अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों को चिह्नित करने को कहा। इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी।


12 मामलों की समीक्षा, लापरवाही पर ANM निलंबित
वर्ष 2026 में अब तक प्रसव के दौरान अथवा प्रसव के कुछ समय बाद हुई 12 महिलाओं की मृत्यु के मामलों की केस स्टडी की जिलाधिकारी ने गहन समीक्षा की। इनमें चार मामलों में संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट आख्या मांगी गई।
प्रेमनगर निवासी रुखसाना की मृत्यु के मामले में आशा और ANM के स्पष्टीकरण में विरोधाभास, आंकड़ों में छेड़छाड़ तथा साक्ष्य के लिए गलत तारीख के फोटो प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आने पर जिलाधिकारी ने ANM के निलंबन के निर्देश दिए।
DM ने स्पष्ट कहा कि आमजन की जिंदगी से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दूरस्थ क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं पर विशेष निगरानी, समय पर आवश्यक जांच और जरूरत पड़ने पर प्रसव से पहले अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश दिए गए।वही हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में महिला को तत्काल उच्च स्वास्थ्य संस्थान रेफर करने और घर पर होने वाले प्रसव के मामलों में आशा कार्यकत्री की जिम्मेदारी तय करने को भी कहा गया।
टीबी जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जनसंख्या के अनुपात में अपेक्षित जांच और एक्स-रे नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने टीबी जांच का दायरा बढ़ाने और निजी क्षेत्र को भी अभियान से जोड़कर अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इस दौरान टीबी से मुक्त हो चुके लोगों और टीबी उन्मूलन के प्रति जनजागरूकता में योगदान देने वाले पांच टीबी चैंपियनों को सम्मानित भी किया गया।
कई स्वास्थ्य संकेतकों में देहरादून बेहतर, लेकिन लिंगानुपात चुनौती
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के कई महत्वपूर्ण संकेतकों में देहरादून राज्य और राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है।
HIMS 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार देहरादून का मातृ मृत्यु अनुपात 31.0 है, जबकि उत्तराखंड में 99 और राष्ट्रीय स्तर पर 97 है। वहीं नवजात शिशु मृत्यु दर 10.4, शिशु मृत्यु दर 13.8 और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 16.0 दर्ज की गई है।हालांकि जन्म के समय लिंगानुपात 924.4 होना प्रशासन के लिए अब भी चुनौती बना हुआ है। यह उत्तराखंड के 984 और राष्ट्रीय औसत 929 से कम है।
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि बेहतर स्वास्थ्य संकेतकों के बावजूद जिन क्षेत्रों में कमी है, वहां डेटा आधारित निगरानी और परिणाम आधारित कार्ययोजना के साथ काम किया जाए, ताकि जमीनी स्तर पर भी स्वास्थ्य सेवाओं में स्पष्ट सुधार दिखाई दे।









