
देहरादून: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को उत्तराखंड की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इन ग्राम सभाओं में भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप जन योजना अभियान (पीपल्स प्लान कैंपेन-पीपीसी) के साथ एकीकृत रूप से ‘रिफॉर्म उत्सव’ का शुभारंभ किया जाएगा।
ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने बताया कि विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाएगी। साथ ही योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनके सुझाव लिए जाएंगे।
ग्राम सभाओं में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कार्मिक अपने विभागीय कार्यक्रमों और योजनाओं की जानकारी देंगे। पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में भी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
ग्रामीणों तक योजनाओं की जानकारी सरल एवं स्थानीय भाषा में पहुंचाने के लिए पैम्फलेट, पोस्टर, आईईसी सामग्री, वीडियो, रील और छायाचित्रों का उपयोग किया जाएगा। वहीं ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों और स्थानीय जरूरतों को ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) सहित अन्य विकास योजनाओं में शामिल करने पर विशेष जोर रहेगा।
जनवरी तक चलेगी विकसित ग्राम पंचायत योजना की प्रक्रिया
वही इसके साथ ही 2 अक्टूबर से वी.बी.-जी. राम जी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत विकसित ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) तैयार करने की नियोजन प्रक्रिया भी शुरू होगी, जो जनवरी तक चलेगी। जीपीडीपी एवं वीजीपीपी से जुड़ी ग्राम सभा बैठकों और सामूहिक नियोजन की गतिविधियां संबंधित विभागों के समन्वय से आयोजित की जाएंगी, ताकि विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन में दोहराव की स्थिति न बने।
विशेष ग्राम सभाओं में ग्रामीण परिवारों के लिए अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित विभिन्न प्रावधानों, योजनाओं और पात्रता की जानकारी भी दी जाएगी। ग्रामीणों को अपनी जरूरत के अनुसार उपलब्ध योजनाओं का लाभ लेने के साथ ही विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा।
‘रिफॉर्म उत्सव’ के माध्यम से ग्राम स्तर पर जनभागीदारी, पारदर्शिता और स्थानीय आवश्यकताओं को विकास योजनाओं में प्राथमिकता देने पर जोर रहेगा। अधिकारियों और क्षेत्रीय कार्मिकों की मौजूदगी में ग्रामीणों के सुझावों के आधार पर गांवों की विकास प्राथमिकताओं को चिन्हित कर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।









