रिटायर्ड ब्रिगेडियर हत्याकांड में 7 महीने बाद पहली जमानत!.आदित्य चौधरी को हाईकोर्ट से राहत,जेल से आज आया बाहर..बाकी 7 आरोपी अब भी सलाखों के पीछे..

30 मार्च को मॉर्निंग वॉक के दौरान गोली मारकर हुई थी रिटायर्ड ब्रिगेडियर की हत्या, हाईकोर्ट ने कहा—आरोपी पर न गोली चलाने की भूमिका, न वाहन चलाने का आरोप; मामले के अन्य 7 आरोपी अभी भी जेल में बंद..

देहरादून: राजधानी देहरादून के बहुचर्चित रिटायर्ड ब्रिगेडियर हत्याकांड में करीब सात महीने बाद एक आरोपी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले में आरोपी आदित्य चौधरी की नियमित जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उसे जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। जानकारी के अनुसार 4 नवंबर 2026 को आरोपी कि हाईकोर्ट से जमानत हुई थी,और उसी क्रम में आज ( 6 नवंबर 2026)क़ो देहरादून जिला अदालत में बचाव पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रशेखर तिवारी द्वारा हाईकोर्ट जमानत अनुपालन प्रक्रिया के तहत तमाम आवश्यक कानूनी औपचारिकता पूरी करते हुए आरोपी आदित्य चौधरी को जेल रिलीज कराया गया.इस मामले में यह पहली बड़ी जमानत बताई जा रही है। हालांकि अभी इस हत्याकांड से जुड़े अन्य 07 आरोपी अभी भी जेल में बंद हैं।

उल्लेखनीय है कि देहरादून में जिला अदालत से जमानत खारिज होने के बाद, नैनीताल हाईकोर्ट में 4 नवंबर 2026 को BA1 संख्या 1403/2026 पर सुनवाई हुई। आरोपी आदित्य चौधरी की ओर से बचाव पक्ष अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से उप-महाधिवक्ता ने इस जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि आरोपी 30 मार्च से न्यायिक हिरासत में है, आरोपपत्र दाखिल हो चुका है तथा उसके विरुद्ध गोली चलाने या वाहन चलाने की कोई विशिष्ट भूमिका सामने नहीं रखी गई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने जमानत का आधार स्वीकार किया।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड सचिवालय में आज से बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध . आदेश हुए जारी...

हाईकोर्ट ने जमानत देने के पीछे क्या बताया आधार?

अदालत के आदेश के मुताबिक, थाना राजपुर में दर्ज मुकदमा संख्या 60/2026 के आरोपी आदित्य चौधरी 30 मार्च 2026 से न्यायिक हिरासत में था। अदालत के समक्ष बचाव पक्ष ने दलील दी कि विवेचना पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। आरोपी पर न तो गोली चलाने की कोई विशिष्ट भूमिका निर्धारित की गई है और न ही वाहन चलाने का आरोप है। जिस हथियार से वारदात को अंजाम दिए जाने का आरोप है, वह सह-आरोपी समीर के कब्जे से बरामद हुआ था। आरोपी के पास से भी कोई हथियार बरामद नहीं हुआ।ऐसे में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि आरोपी 30 मार्च से न्यायिक हिरासत में है, आरोपपत्र दाखिल हो चुका है तथा उसके विरुद्ध गोली चलाने या वाहन चलाने की कोई विशिष्ट भूमिका सामने नहीं रखी गई है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने जमानत का आधार स्वीकार किया।

यह भी पढ़ें 👉  आस्था:2027 कुंभ के भव्य आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने अखाड़ों के आचार्यों एवं संतों के साथ की बैठक..2027 कुंभ स्नान की महत्वपूर्ण तिथियों की भी घोषणा..

दो जमानतियों और निजी मुचलके पर रिहाई के आदेश

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपी को संबंधित न्यायालय की संतुष्टि के अनुसार निजी मुचलका भरने और समान राशि के दो विश्वसनीय जमानती प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा किया जाए। इसके बाद एडीजे-4 की अदालत में जमानत संबंधी औपचारिकताएं पूरी करते हुए 50-50 हजार रुपये के जमानत बांड और निजी मुचलके पर रिहाई के आदेश की जानकारी सामने आई है।

क्या था पूरा मामला?

पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार, 30 मार्च 2026 की सुबह राजपुर थाना क्षेत्र के सिनोला-जोहड़ी गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के पास मॉर्निंग वॉक के दौरान रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश कुमार जोशी अपने परिजनों के साथ थे। इसी दौरान एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो कार और उसके पीछे आ रही काले रंग की कार से जुड़ी वारदात में गोली चलने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

यह भी पढ़ें 👉  रायपुर हत्याकांड: मुख्य अभियुक्त रामबीर की प्रेमिका भी थी घटनाक्रम में शामिल..प्रेमिका के घर से हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल और कारतूस बरामद..अभियुक्ता फरार,तलाश जारी..पुलिस रिमाण्ड के दौरान रामबीर की निशानदेही पर जुटाए गए तमाम साक्ष्य..

इस मामले में थाना राजपुर में एफआईआर संख्या 60/2026 दर्ज की गई थी। पुलिस ने जांच के बाद 12 जून 2026 को आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था। मामले में आर्म्स एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

फिलहाल सात आरोपी जेल में

हाईकोर्ट से आदित्य चौधरी को मिली जमानत ने बहुचर्चित हत्याकांड में एक नया कानूनी मोड़ ला दिया है। हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जमानत का फैसला मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना दिया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया है। मुकदमे की सुनवाई और आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। मामले के अन्य सात आरोपी अभी भी जेल में बंद हैं।

परमजीत सिंह लाम्बा

संपादक - ख़बर सनसनी PH-7454913200,7906640014

सम्बंधित खबरें