
देहरादून की विशेष NDPS अदालत का फैसला, बुजुर्ग होने और खराब स्वास्थ्य की दलील भी नहीं आई काम; व्यावसायिक मात्रा में नशीली गोलियों की बरामदगी को माना गंभीर अपराध.. 9720 नशीली गोलियों के साथ पकड़ा गया था अभियुक्त …
देहरादून: नशे के कारोबार से जुड़े करीब 12 साल पुराने मामले में देहरादून की विशेष NDPS अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषसिद्ध 70 वर्षीय आरोपी सूरज पाल को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा….मामला वर्ष 2014 का है। न्यायालय के अभिलेखों के अनुसार, कोतवाली देहरादून में 6 जून 2014 को NDPS एक्ट की धारा 8/22 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले में सहसपुर क्षेत्र के ग्राम लक्ष्मीपुर निवासी सूरज पाल पुत्र प्रभुलाल को आरोपी बनाया गया था। पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपी के कब्जे से 9,720 एलप्राजोलम (Alprazolam) की गोलियां और डायजेपाम (Diazepam) का एक इंजेक्शन बरामद होने का उल्लेख न्यायालय के फैसले में किया गया है।

बुजुर्ग होने और बीमारी का दिया हवाला
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से आरोपी की उम्र करीब 70 वर्ष होने और विभिन्न बीमारियों से ग्रसित होने का हवाला देते हुए कम से कम सजा देने की मांग की गई। आरोपी ने भी अपनी वृद्धावस्था और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए नरमी बरतने की अपील की।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि आरोपी से भारी मात्रा में 9,720 नशीली गोलियां और प्रतिबंधित इंजेक्शन बरामद हुआ था। यह व्यावसायिक मात्रा की श्रेणी का गंभीर अपराध है और आरोपी नशीले पदार्थों के कारोबार में संलिप्त था। लिहाजा उसके प्रति कठोर रुख अपनाया जाना चाहिए।
अदालत ने क्यों नहीं दी रियायत?
विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों का अवलोकन करने के बाद माना कि आरोपी से बड़ी संख्या में नशीली गोलियां बरामद हुई थीं। इसके अतिरिक्त डायजेपाम इंजेक्शन की बरामदगी भी हुई। अदालत ने इसे समाज विरोधी और गंभीर प्रकृति का अपराध माना…अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी की वृद्धावस्था और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखने के बावजूद बरामद नशीले पदार्थों की मात्रा और अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
10 साल की कैद, एक लाख रुपये जुर्माना
विशेष न्यायाधीश मोनिका मित्तल की अदालत ने 30 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में NDPS एक्ट की धारा 8/22(सी) के तहत दोषसिद्ध सूरज पाल को 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
कोर्ट आदेश में यह भी उल्लेख है कि मामले की जांच और विचारण के दौरान जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। आरोपी को सजा भुगतने के लिए जिला कारागार देहरादून भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
12 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले में अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नशीले पदार्थों की व्यावसायिक मात्रा से जुड़े गंभीर मामलों में आरोपी की उम्र और व्यक्तिगत परिस्थितियों के साथ अपराध की प्रकृति और बरामदगी की मात्रा को भी सजा तय करते समय ध्यान में रखा जाएगा।














