
पुरोला/उत्तरकाशी: रवांई घाटी की पहचान और किसानों की आजीविका से जुड़ी लाल धान की फसल इन दिनों कटाई के लिए तैयार है। पुरोला क्षेत्र के रामा सिरांई और कमल सिरांई को लाल धान उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में जाना जाता है। क्षेत्र को लाल चावल के उत्पादन के कारण ‘लाल चावल का कटोरा’ भी कहा जाता है।लेकिन कटाई के ऐन वक्त पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पककर तैयार खड़ी फसल के साथ-साथ जिन किसानों ने धान काटकर सुखाने के लिए खेतों में रखा था, उनके सामने भी फसल को सुरक्षित रखने की चुनौती पैदा हो गई है।
🌧️ मेहनत पर मौसम की मार:
उत्तरकाशी पुरोला निवासी किसानों ने कई महीनों की मेहनत और लागत के बाद लाल धान की फसल तैयार की है। इस समय फसल की कटाई और सुखाने का महत्वपूर्ण दौर चल रहा है। लगातार बारिश से खेतों में नमी बढ़ने के कारण कटाई प्रभावित हो रही है और किसानों को फसल सुरक्षित रखने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में यदि बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहता है तो तैयार फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।



🗣️ दर्मियान सिंह पंवार ने उठाई किसानों की आवाज
जिला अध्यक्ष सैनिक प्रकोष्ठ, पुरोला उत्तरकाशी, दर्मियान सिंह पंवार ने लाल धान उत्पादक किसानों की चिंता को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन और कृषि विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल फसल नुकसान का स्थलीय निरीक्षण और सर्वे कराने की मांग की है।उन्होंने कहा कि लाल धान केवल एक फसल नहीं बल्कि रवांई की कृषि संस्कृति, परंपरा और पहचान से जुड़ा हुआ है। मौसम की मार से किसानों की महीनों की मेहनत प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।दर्मियान सिंह पंवार ने प्रशासन से मांग की कि बारिश से प्रभावित किसानों को आवश्यक तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने के साथ-साथ वास्तविक नुकसान का आकलन कर नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाए।
बाईट :दर्मियान सिंह पंवार.
बाईट :जय सिंह राणा,किसान, पुरोला, उत्तरकाशी..
📌 प्रशासन के सामने प्रमुख मांगें
प्रभावित गांवों में तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए।
खेतों में तैयार और काटकर रखी फसल के नुकसान का अलग-अलग आकलन किया जाए।
कृषि विभाग की टीम किसानों को फसल बचाने के लिए आवश्यक तकनीकी सलाह दे।
पात्र किसानों को सरकारी प्रावधानों के अनुसार क्षतिपूर्ति/सहायता उपलब्ध कराई जाए।
🌾 रवांई की पहचान बचाने की जरूरत
लाल धान रवांई घाटी की पारंपरिक कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी खेती से जुड़े किसानों को मौसम, रोग और बाजार जैसी चुनौतियों से बचाने के लिए समय पर सरकारी हस्तक्षेप जरूरी है।कटाई के इस संवेदनशील दौर में अब किसानों की नजर मौसम के अगले रुख के साथ-साथ प्रशासन की कार्रवाई पर भी टिकी है। किसानों की मांग है कि उनकी वर्षों की मेहनत और क्षेत्र की पारंपरिक लाल धान की पहचान को बचाने के लिए सरकार और प्रशासन तत्काल प्रभावी कदम उठाए।









