
विधानसभा चुनाव सर पर, जनता त्रस्त,अधिकारी मस्त..
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बार-बार सड़कों को गड्ढामुक्त करने के निर्देश और 15 अक्टूबर की निर्धारित समयसीमा के बावजूद देहरादून की कई सड़कों की तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। सामने आई तस्वीरों में सड़क की उखड़ी परतें, जगह-जगह गहरे गड्ढे, बिखरी बजरी और अधूरी मरम्मत साफ नजर आ रही है। ऐसे में गड्ढामुक्त सड़कों के दावों और धरातल की स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।






मरम्मत के दावे, लेकिन सड़क पर गड्ढों का जाल!
सड़क की हालत ऐसी है कि वाहन चालकों को संभल-संभलकर आगे बढ़ना पड़ रहा है। दिन में दिखाई देने वाले गड्ढे रात के अंधेरे में और भी खतरनाक हो जाते हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यहां से गुजरना खास तौर पर जोखिम भरा है। सड़क पर फैली बजरी और उखड़ी हुई सतह दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ाती है, जबकि आम लोगों को रोजाना आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ रही है।
एक ही जगह मरम्मत, फिर भी अधूरा काम?
सवाल सिर्फ सड़क की बदहाली का नहीं, बल्कि मरम्मत की गुणवत्ता का भी है। आरोप हैं कि कुछ स्थानों पर गड्ढों को ठीक से भरे बिना ही मरम्मत की औपचारिकता पूरी कर दी गई। कहीं सड़क की सतह समतल नहीं है, तो कहीं पैचवर्क के बावजूद गड्ढों और उखड़े हिस्सों से राहत नहीं मिली है। यदि मरम्मत के बाद भी सड़क की यही स्थिति बनी हुई है, तो संबंधित कार्यों की गुणवत्ता और निरीक्षण की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों पर अमल कौन सुनिश्चित करेगा?
जब मुख्यमंत्री स्तर से सड़कों की मरम्मत के लिए स्पष्ट निर्देश और समयसीमा तय की गई, तो फिर निर्धारित अवधि तक काम की वास्तविक प्रगति क्या रही? क्या संबंधित विभागों ने सड़कों का मौके पर निरीक्षण किया? क्या मरम्मत की गुणवत्ता जांची गई? और यदि काम अधूरा है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
ये सवाल अब जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने हैं। केवल मरम्मत पूरी होने की रिपोर्ट देना पर्याप्त नहीं है; सड़क की वास्तविक स्थिति और काम की गुणवत्ता भी सामने आनी चाहिए।
जनता को राहत कब मिलेगी?
देहरादून की इन तस्वीरों ने गड्ढामुक्त सड़क अभियान की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग प्रभावित सड़कों का स्थलीय निरीक्षण करें, अधूरे कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराएं और घटिया या अधूरी मरम्मत की शिकायतों की जांच करें।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब सड़कें सुधारने की समयसीमा तय है, तो जनता को सुरक्षित और गड्ढामुक्त सफर के लिए अभी और कितना इंतजार करना पड़ेगा?











