
उत्तराखंड कौथिक-2026 में लोकभाषा, लोकगीत और पारंपरिक व्यंजनों के संरक्षण पर दिया जोर, 3 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि का किया उल्लेख।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को रेंजर्स कॉलेज ग्राउंड में आयोजित उत्तराखंड कौथिक-2026 में प्रतिभाग कर प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक विरासत के संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति केवल हमारी पहचान नहीं, बल्कि हमारी आत्मा है। लोकभाषा, लोकगीत, लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा, मेले और त्योहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर के अभिन्न अंग हैं। इन्हें संरक्षित रखना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।






अखिल गढ़वाल सभा की ओर से आयोजित इस महोत्सव में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड कौथिक जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों, हस्तशिल्प और पारंपरिक खानपान को मंच मिलने के साथ स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर मिलता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार विकास के साथ विरासत के संरक्षण के संकल्प पर काम कर रही है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में पुनर्विकास कार्यों के साथ धार्मिक पर्यटन को स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। सीमांत क्षेत्रों में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सड़क, बिजली, संचार, पर्यटन और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाजार
धामी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि युवाओं को रोजगार के लिए अपने गांव और प्रदेश से बाहर न जाना पड़े। इसके लिए ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार और नई पहचान दी जा रही है। होम-स्टे, कृषि, बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन और सुगंधित पौधों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘वेड इन उत्तराखंड’, शीतकालीन पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म जैसी पहलों से प्रदेश में वर्षभर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय युवाओं, होटल व्यवसायियों और होम-स्टे संचालकों के लिए रोजगार के अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
3 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला है। ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत प्रदेश की 3 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों, पहाड़ी व्यंजनों, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि पलायन निवारण आयोग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इसे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसरों के विस्तार का संकेत बताया। साथ ही स्टार्टअप इंडिया की राज्य रैंकिंग, नीति आयोग के एसडीजी इंडेक्स और निवेश से जुड़े अन्य क्षेत्रों में उत्तराखंड की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजना भी जरूरी है। लोकभाषाओं, लोककलाओं, पारंपरिक वेशभूषा और रीति-रिवाजों को बचाने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि अखिल गढ़वाल सभा सहित सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाएं इस दिशा में अपना योगदान जारी रखेंगी।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, अखिल गढ़वाल सभा के पदाधिकारी, लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, लोकगायिका संगीता ढोंडियाल, विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।













