
खेल का सपना टूटा, तो देशसेवा का संकल्प बना ताकत… कुहू गर्ग ने IPS अकादमी में रचा इतिहास..
देहरादून: मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बदल जाए, तो सपनों को छोड़ना जरूरी नहीं… मेहनत और हौसले से नई मंजिल भी हासिल की जा सकती है। इस बात को सच कर दिखाया है उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार की बेटी कुहू गर्ग ने। अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाने वाली कुहू ने घुटने की गंभीर चोट के बाद अपने करियर को नई दिशा दी और अब भारतीय पुलिस सेवा की ट्रेनिंग में प्रतिष्ठित ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ हासिल कर अपनी सफलता की नई कहानी लिखी है।



हैदराबाद पुलिस अकादमी में शानदार प्रदर्शन
तेलंगाना स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में आयोजित 2024 बैच के 151 आईपीएस अधिकारियों की पासिंग आउट परेड के दौरान कुहू गर्ग को ‘बेस्ट आउटडोर प्रोबेशनर’ के सम्मान से नवाजा गया। उन्हें अकादमी का प्रतिष्ठित ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ भी मिला। इसके अलावा कुहू ने ‘बेस्ट ड्रिल’ का पुरस्कार भी अपने नाम किया।
ये उपलब्धियां उनके कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन, शारीरिक क्षमता और निरंतर मेहनत को दर्शाती हैं। घुड़सवारी, कमांडो ट्रेनिंग, हथियारों की फायरिंग, तैराकी और क्रॉस-कंट्री जैसी चुनौतीपूर्ण गतिविधियों में प्रदर्शन करते हुए कुहू ने साबित किया कि बड़ी जिम्मेदारियों के लिए मजबूत इरादों के साथ निरंतर अभ्यास भी जरूरी है।
चोट के बाद बदली राह, लेकिन नहीं बदला लक्ष्य
कुहू गर्ग का सफर युवाओं के लिए खास प्रेरणा है। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर की बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुकी हैं और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। लेकिन घुटने में गंभीर एसीएल चोट लगने के बाद उनके खेल करियर पर विराम लगा।
ऐसे समय में उन्होंने हार मानने के बजाय अपने लिए एक नई राह चुनी। कुहू ने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई। अब पुलिस अकादमी में मिले इन प्रतिष्ठित सम्मानों ने उनके संघर्ष और समर्पण को एक नई पहचान दी है।
पिता को बेटी पर गर्व, युवाओं के लिए बनीं मिसाल
पूर्व डीजीपी अशोक कुमार ने अपनी पत्नी अलकनंदा के साथ बेटी की इस उपलब्धि पर गर्व जताया। उनके लिए यह केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस सपने की मंजिल है, जिसे कुहू ने बचपन से देखा और अपनी मेहनत से साकार किया।
अशोक कुमार ने पुलिस की वर्दी को अनुशासन, त्याग और देश के प्रति बड़ी जिम्मेदारी का प्रतीक बताते हुए कुहू की उपलब्धि को गौरवपूर्ण क्षण के रूप में साझा किया।
कुहू गर्ग की कहानी एक स्पष्ट संदेश देती है:—असफलता या मुश्किलें आपकी मंजिल तय नहीं करतीं, बल्कि उनके सामने आपका हौसला तय करता है कि आप कितनी दूर तक जाएंगे। खेल के मैदान से सिविल सेवा और फिर पुलिस अकादमी के सर्वोच्च सम्मानों तक का उनका सफर उन तमाम युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।











