
CM धामी का स्पष्ट संदेश:-राजस्व की वसूली बढ़े और ईमानदारी से बिल चुकाने वाले उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े..
रुड़की सर्किल में तीन साल के दौरान 964.465 मिलियन यूनिट बिजली का वितरण नुकसान; कुमाऊं में 250 से अधिक मामले दर्ज करने का दावा
देहरादून: उत्तराखंड में बिजली चोरी और वितरण नुकसान का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। ऊर्जा निगम को हर साल करोड़ों रुपये के नुकसान की समस्या से निपटने के लिए छापेमारी और जांच अभियान तेज किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बिजली चोरी पर रोक लगाने और वितरण नुकसान कम करने के लिए सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई है।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2023-24 के दौरान रुड़की विद्युत वितरण सर्किल में कुल 964.465 मिलियन यूनिट का वितरण नुकसान दर्ज हुआ, जिसकी अनुमानित लागत ₹488.50 करोड़ थी। रिपोर्ट में हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के कई डिवीजनों में अधिक वितरण नुकसान का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, वितरण नुकसान के पूरे आंकड़े को केवल बिजली चोरी का परिणाम मानना सही नहीं होगा; इसमें तकनीकी नुकसान और बिलिंग व वसूली से जुड़ी कमियां भी शामिल हो सकती हैं।
आठ शहरों में 27 से 69 प्रतिशत तक AT&C लॉस
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2027-28 के बिजनेस प्लान में वित्तीय वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के आधार पर आठ शहरों में अधिक AT&C लॉस दर्ज किया गया है।
इनमें लंढौरा में 69.40 प्रतिशत, जोशीमठ में 53.92 प्रतिशत, खटीमा में 53 प्रतिशत, मंगलौर में 47.62 प्रतिशत, गदरपुर में 30.58 प्रतिशत, जसपुर और लक्सर में 27-27 प्रतिशत तथा सितारगंज में 27.25 प्रतिशत नुकसान दर्ज किया गया। आयोग ने ऊर्जा निगम को इन क्षेत्रों में नुकसान कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई है।
बिजली चोरी रोकने के लिए पुलिस के साथ छापेमारी
ऊर्जा निगम अब बिजली चोरी की आशंका वाले क्षेत्रों में जांच और छापेमारी के लिए पुलिस बल का सहयोग ले रहा है। कुमाऊं क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान 250 से अधिक बिजली चोरी के मामले दर्ज किए जाने की जानकारी यूपीसीएल के कुमाऊं चीफ शेखर त्रिपाठी के हवाले से दी गई है। अभियान का उद्देश्य अवैध कनेक्शन, मीटर में गड़बड़ी और बिजली के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाना है।
विभाग ट्रांसफॉर्मर और फीडर स्तर पर बिजली की खपत का मिलान करने के लिए मीटरिंग और एनर्जी ऑडिट जैसी तकनीकों का भी सहारा ले रहा है, ताकि नुकसान वाले क्षेत्रों की पहचान कर कार्रवाई की जा सके।
आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है असर
बिजली वितरण में अधिक नुकसान का असर ऊर्जा निगम की वित्तीय स्थिति और बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है। नियमित बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं के हित में जरूरी है कि बिजली चोरी के मामलों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और वितरण व्यवस्था की कमियों को भी दूर किया जाए।
CM धामी का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बिजली चोरी रोकने को ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी बताते हुए नुकसान कम करने के लिए सख्त कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर पुलिस बल के इस्तेमाल की बात कही है। सरकार के सामने चुनौती है कि बिजली चोरी पर प्रभावी अंकुश लगे, राजस्व की वसूली बढ़े और ईमानदारी से बिल चुकाने वाले उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।












