
देहरादून में सुबह 6 बजे सड़कों पर उतरे लोक निर्माण सचिव पंकज कुमार पांडेय, लेकिन अधूरी मरम्मत और गुणवत्ता पर सवाल बरकरार! त्योहार सिर पर, जनता बदहाल सड़कों से परेशान।
देहरादून: उत्तराखंड में गड्ढामुक्त सड़कों के दावों की पोल अब भी खुलती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बार-बार निर्देशों के बावजूद जब सड़क सुधार का काम तय समय पर पूरा नहीं हुआ, तो लोक निर्माण विभाग ने अब नई डेडलाइन जारी कर दी है। पहले 15 अक्टूबर तक सड़कों को गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य था, लेकिन अब 18 अक्टूबर 2026 तक का अल्टीमेटम दिया गया है। सवाल है—जब पहले ही समयसीमा तय थी, तो सड़कें अब तक दुरुस्त क्यों नहीं हुईं?




मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडेय शनिवार सुबह 6 बजे ही सड़कों की हकीकत परखने निकल पड़े। कालीदास रोड टर्न से शुरू हुआ निरीक्षण कैनाल रोड, नागल, मसूरी डायवर्जन, सहस्रधारा तिराहा, लाडपुर, जोगीवाला, रिस्पना पुल, घंटाघर, चकराता रोड और गढ़ी कैंट तक पहुंचा। अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सड़क सुधार का काम पूरा किया जाए। हालांकि इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन क्षेत्रों में निरीक्षण किया गया वहां की हालत इतनी खराब नहीं है, जितना की शहर को जोड़ने वाली सड़कों की हालत खस्ता है, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने उन क्षेत्रों की तरफ जाना मुनासिब न समझा!..
लेकिन असली सवाल निरीक्षण नहीं, नतीजों का है। जमीनी स्तर पर कई स्थानों पर गड्ढे पूरी तरह नहीं भरे जाने और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठने की शिकायतें हैं। ऐसे में बारिश और मौसम की परिस्थितियों का हवाला देकर देरी की सफाई देना कितना पर्याप्त है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं की जवाबदेही भी तय होगी?
त्योहारी सीजन सिर पर है। सड़कों पर आवाजाही बढ़ने के साथ गड्ढे हादसों का खतरा भी बढ़ा सकते हैं। सचिव ने कार्यदायी संस्थाओं को तेजी से काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अब विभाग के सामने चुनौती केवल गड्ढे भरने की नहीं, बल्कि टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत सुनिश्चित करने की भी है।
अब 18 अक्टूबर की डेडलाइन निर्णायक होगी। अगर इस बार भी सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हुईं, तो सवाल सिर्फ मौसम पर नहीं, बल्कि सरकारी दावों, कार्यों की निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर भी उठेंगे। जनता को नए फरमान नहीं, गड्ढों से वास्तविक राहत चाहिए।











